खुद को संभाल लेना – A Hindi poetry by Shobhana Vamja

खुद को संभाल लेना…
बचपन से पकड़ी पापा की वो ऊंगली,
जब उड़ना पड़े बनकर तितली,
तो खुद को संभाल लेना।

जब बातों बातों में जागकर पूरी रात,
वह दोस्तों की महफ़िल भूलना पड़े,
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।

अजनबी कोई अपना यार बन जाए,
बिना उसके जीना मुश्किल हो जाए,
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।

जिससे हो बेशुमार प्यार,
और बदल जाए उनका व्यवहार,
बस खुद को तू संभाल लेना।

नाम करो बच्चों के अपनी खुशियां,
वो जो छोटी-सी बात पर बना लें दूरियां
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।

उम्र के साथ कभी तन भी लगे कमज़ोर
और दवाई से चले जीवन की डोर,
तो थोड़ा खुद को संभाल लेना।

आखिर तेरे सिवा है ही कौन तेरा?
जब बात ये समझ ले तो यकीन कर,
फिर तू ही तुझे संभाल लेगा।

    Some links on this page are affiliate links. If you buy through them, this site may earn a commission at no extra cost to you.