मृत्यु की खबर – A Hindi poetry by Japan Vora

जैसे आकस्मिक
कोई धुन कोई गीत पुराना बजे
और फिर वही
संवेदना के द्वार खुल जाए
वैसे ही उठती है
एक लहर
जब कोई सुनाएं
किसी के मृत्यु की खबर
जैसे गरजते बादलों से
बरसती है बारिश बेहिसाब
और बिजली के चमकने से
झूम उठे रात का प्रहर
फिर सुबह की धूप में
वैसे ही सूख जाए सारा शहर
जैसे कोई सुनाएं
किसी के मृत्यु की खबर
जैसे दिन के उजाले में संवरती है
जिंदगी किसी हसीं ख्वाब की तरह
फिर यादें ही तो रह जाती है रोशन
खलाओ में आफताब की तरह
इसी रोशनी में खो जाते हे साये
जल जाती है परछाइयां
वैसे ही न रहे पाए कोई वजूद
हयात से हो जाता हूं बेखबर
जब कोई सुनाएं
किसी के मृत्यु की खबर